स्पर्म काउंट कम और मोटिलिटी कमज़ोर: सीमन रिपोर्ट कैसे पढ़ें, कारण क्या हैं और इलाज कैसे होता है
प्रकाशित 7 सित॰ 2026 · अपडेट 2 अक्टू॰ 2026 · 10 मिनट
सीधा जवाब
हाँ, कम स्पर्म काउंट और कमज़ोर मोटिलिटी अक्सर सुधर सकती है, लेकिन रातों-रात नहीं और सिर्फ़ जड़ी-बूटी के पाउडर से नहीं। स्पर्म को बनने और परिपक्व होने में लगभग 72 से 90 दिन लगते हैं, इसलिए सुधार लगभग तीन महीने बाद की रिपोर्ट में दिखता है। इलाज सही तरीके से ली गई सीमन जाँच से शुरू होता है, फिर कारण ढूँढा जाता है: वैरिकोसील, हार्मोन, इन्फेक्शन, गर्मी, स्मोकिंग या ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस।
क्या कम स्पर्म काउंट या कमज़ोर मोटिलिटी की रिपोर्ट ठीक हो सकती है?
बहुत बार हाँ। स्पर्म बनने की प्रक्रिया (स्पर्मेटोजेनेसिस) लगातार चलती रहती है, और स्पर्म के एक नए बैच को बनने और परिपक्व होने में लगभग 72 से 90 दिन लगते हैं। इसीलिए सीमन रिपोर्ट पिछले तीन महीनों में आपके शरीर का हाल दिखाती है, और दोबारा जाँच इलाज या लाइफस्टाइल बदलाव के करीब तीन महीने बाद ही करना ठीक रहता है।
जब कपल बच्चे की प्लानिंग में क्लिनिक आता है और पति की रिपोर्ट में काउंट कम या स्पर्म धीमे आते हैं, तो पहला सवाल यही होता है: "क्या यह रिपोर्ट हमेशा ऐसी ही रहेगी? क्या दवाओं से सब नॉर्मल हो सकता है?" ईमानदार जवाब है कि यह कारण पर निर्भर करता है। अगर वैरिकोसील, हार्मोन की गड़बड़ी, इन्फेक्शन या ज़्यादा गर्मी जैसा इलाज-योग्य कारण मिल जाए और ठीक किया जाए, तो कई पुरुषों में एक-दो स्पर्म साइकिल में साफ़ सुधार दिखता है। कुछ पुरुषों को IUI या IVF/ICSI जैसे सहायक विकल्प चाहिए होते हैं, और यह भी एक अच्छा नतीजा है, हार नहीं।
याद रखें कि जिन कपल्स को बच्चा होने में दिक्कत होती है, उनमें लगभग आधे मामलों में पुरुष की तरफ़ का कारण भी शामिल होता है। इसलिए एक साल कोशिश करने के बाद भी गर्भधारण न हो तो सीमन एनालिसिस पहली जाँचों में से एक है।
सीमन एनालिसिस की नॉर्मल वैल्यू क्या हैं (WHO रेफरेंस लिमिट)?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) सीमन के पैरामीटर्स की निचली रेफरेंस सीमाएँ तय करता है। नीचे की वैल्यू WHO Laboratory Manual के 6th edition (2021) से हैं। किसी वैल्यू का सीमा से नीचे होना यह नहीं बताता कि आप बाप नहीं बन सकते, और सीमा से ऊपर होना गर्भधारण की गारंटी नहीं है। यह डॉक्टर के लिए एक मार्गदर्शक है।
| पैरामीटर | निचली रेफरेंस सीमा | सीमा से कम होने पर नाम |
|---|---|---|
| सीमन वॉल्यूम | 1.4 mL प्रति स्खलन | Hypospermia |
| स्पर्म कंसन्ट्रेशन (काउंट) | 16 million प्रति mL | Oligozoospermia |
| कुल स्पर्म संख्या | 39 million प्रति स्खलन | Oligozoospermia (कुल संख्या कम) |
| टोटल मोटिलिटी (प्रोग्रेसिव + नॉन-प्रोग्रेसिव) | 42% | Asthenozoospermia |
| प्रोग्रेसिव मोटिलिटी (सीधे आगे बढ़ने वाले) | 30% | Asthenozoospermia |
| नॉर्मल आकार (मॉर्फोलॉजी) | 4% | Teratozoospermia |
| वाइटैलिटी (जीवित स्पर्म) | 54% | Necrozoospermia |
ऑलिगोज़ूस्पर्मिया, एस्थेनोज़ूस्पर्मिया और टेराटोज़ूस्पर्मिया का मतलब क्या है?
रिपोर्ट में लिखे ये शब्द बताते हैं कि स्पर्म की क्वालिटी का कौन-सा हिस्सा रेफरेंस सीमा से नीचे है।
- Oligozoospermia (अक्सर oligospermia लिखा जाता है): स्पर्म कंसन्ट्रेशन 16 million प्रति mL से कम होना।
- Azoospermia: वीर्य में एक भी स्पर्म न मिलना। यह रुकावट वाला (obstructive) या बनने की समस्या वाला (non-obstructive) हो सकता है, और दोनों का इलाज बहुत अलग है।
- Asthenozoospermia: मोटिलिटी कम होना, यानी बहुत कम स्पर्म चल रहे हैं या ठीक से आगे नहीं बढ़ रहे। धीमे स्पर्म को अंडे तक पहुँचने में मुश्किल होती है।
- Teratozoospermia: ऐसे स्पर्म का ज़्यादा होना जिनका सिर, गर्दन या पूँछ असामान्य आकार की हो। ध्यान रहे कि नॉर्मल आकार की सीमा सिर्फ़ 4% है, यानी हर पुरुष के ज़्यादातर स्पर्म माइक्रोस्कोप में असामान्य दिखते हैं।
- Necrozoospermia: मृत स्पर्म का ज़्यादा हिस्सा होना।
स्पर्म काउंट और मोटिलिटी कम होने के मुख्य कारण क्या हैं?
ज़्यादातर पुरुषों में एक से ज़्यादा कारण साथ में होते हैं। डॉक्टर पहले मेडिकल कारण खोजते हैं, फिर लाइफस्टाइल और वातावरण के कारण। एक आम कड़ी इस तरह होती है:
- अंडकोष में गर्मी, वैरिकोसील या हार्मोन असंतुलन
- टेस्टिस में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस
- स्पर्म DNA को नुकसान
- कम काउंट और कमज़ोर मोटिलिटी
- वैरिकोसील: अंडकोष के आसपास की नसों का फूल जाना। इससे स्क्रोटम का तापमान बढ़ता है और स्पर्म को नुकसान हो सकता है। बांझपन की जाँच कराने वाले पुरुषों में यह काफ़ी बड़े हिस्से में मिलता है, और यह उन गिने-चुने कारणों में है जो सर्जरी से ठीक हो सकते हैं।
- हार्मोन की समस्या: पिट्यूटरी ग्रंथि से FSH और LH का कम निकलना, या testosterone, prolactin या थायरॉइड हार्मोन का असंतुलन स्पर्म बनना घटा देता है। ये जाँचें कैसे होती हैं, यह हमारी low testosterone गाइड में समझाया है।
- ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस: ज़्यादा स्मोकिंग, शराब, मोटापा, खराब खान-पान और प्रदूषण से फ्री रेडिकल्स बनते हैं जो स्पर्म को नुकसान पहुँचाते हैं और स्पर्म DNA फ्रैगमेंटेशन इंडेक्स बढ़ाते हैं।
- इन्फेक्शन और पुरानी बीमारी: क्रॉनिक प्रोस्टेटाइटिस, एपिडिडाइमाइटिस, यौन संक्रमण या बड़ी उम्र में हुआ मम्प्स।
- दवाएँ और हार्मोन: testosterone रिप्लेसमेंट थेरेपी और एनाबॉलिक स्टेरॉयड स्पर्म बनना बंद कर देते हैं (नीचे चेतावनी देखें)।
- जेनेटिक और जन्मजात कारण: बचपन में अंडकोष का नीचे न उतरना, या क्रोमोसोम से जुड़ी स्थितियाँ, जिनकी जाँच विशेषज्ञ करता है।
सीमन सैंपल कैसे दें ताकि रिपोर्ट सही आए?
सैंपल सही तरीके से लेना ज़रूरी है, क्योंकि गलत तरीके से लिया गया सैंपल एक सामान्य पुरुष को भी असामान्य दिखा सकता है। ये नियम मानें:
- परहेज़: जाँच से पहले 2 से 7 दिन स्खलन न करें (ज़्यादातर लैब 3 से 5 दिन कहती हैं)। 2 दिन से कम में काउंट और वॉल्यूम घट सकता है, और बहुत लंबे गैप से मोटिलिटी घट सकती है।
- सैंपल लेने का तरीका: लैब से मिले स्टेराइल कंटेनर में हस्तमैथुन से पूरा सैंपल लें। आम कंडोम या विदड्रॉअल का इस्तेमाल न करें, और शुरुआती हिस्सा बिल्कुल न छूटे।
- समय: सैंपल को शरीर के तापमान के करीब रखें और 30 से 60 मिनट के अंदर लैब पहुँचाएँ। इसे फ्रिज में न रखें।
- बुखार, बीमारी या नई दवा बताएँ: पिछले तीन महीनों में हुआ बुखार अस्थायी रूप से स्पर्म क्वालिटी घटा सकता है।
- जाँच दोहराएँ: पहली रिपोर्ट असामान्य हो तो आमतौर पर कुछ हफ़्तों बाद दूसरा सैंपल माँगा जाता है।
कम स्पर्म काउंट का इलाज कैसे होता है?
इलाज इस पर निर्भर करता है कि जाँच में क्या मिलता है। डॉक्टर आमतौर पर शारीरिक जाँच, ज़रूरत हो तो स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड, और FSH, LH, testosterone तथा कभी-कभी prolactin और थायरॉइड की ब्लड जाँच कराते हैं। हर पुरुष का इलाज एक जैसा नहीं होता।
कारण का इलाज
- वैरिकोसील: अगर यह क्लिनिकली महत्वपूर्ण है और सीमन रिपोर्ट असामान्य है, तो माइक्रोस्कोपिक वैरिकोसीलेक्टोमी (सर्जिकल मरम्मत) से कई पुरुषों में तीन से छह महीने में स्पर्म पैरामीटर सुधर सकते हैं।
- इन्फेक्शन: प्रोस्टेटाइटिस, एपिडिडाइमाइटिस या यूरिन/जननांग का इन्फेक्शन जाँच के बाद सही एंटीबायोटिक से ठीक किया जाता है।
- स्पर्म को नुकसान पहुँचाने वाली दवाएँ: डॉक्टर आपकी ली जा रही हर चीज़ देखते हैं, एनाबॉलिक स्टेरॉयड समेत, और जो ज़रूरी नहीं उसे बंद या बदल देते हैं।
हार्मोनल इलाज (विशेषज्ञ की निगरानी में)
जिन पुरुषों में FSH और LH कम होते हैं, उनमें डॉक्टर हार्मोन को संतुलित करने वाली दवाएँ दे सकते हैं। Clomiphene citrate या tamoxifen, जो पिट्यूटरी से टेस्टिस तक जाने वाले संकेत बढ़ाते हैं, पुरुष बांझपन में ऑफ़-लेबल इस्तेमाल होते हैं, यानी इस काम के लिए आधिकारिक रूप से स्वीकृत नहीं हैं। इन्हें सिर्फ़ विशेषज्ञ की निगरानी में, ब्लड टेस्ट और फॉलो-अप सीमन जाँच के साथ लेना चाहिए। कुछ पुरुषों में असर बेहतर होता है, कुछ में कम, और नतीजे अलग-अलग होते हैं।
एंटीऑक्सीडेंट और सप्लीमेंट (असर सीमित, सबूत मिले-जुले)
Coenzyme Q10, L-carnitine, zinc, selenium, lycopene और N-acetyl cysteine (NAC) सप्लीमेंट हैं, बांझपन की साबित दवाएँ नहीं। कुछ अध्ययनों में, खासकर छोटे अध्ययनों में, मोटिलिटी या काउंट में हल्का सुधार दिखा है; कुछ में कोई साफ़ फ़ायदा नहीं दिखा, और यह पक्का नहीं है कि इनसे जीवित बच्चे पैदा होने की दर बढ़ती है। डॉक्टर कारण के इलाज के साथ तीन महीने के लिए कोई कॉम्बिनेशन सुझा सकते हैं, पर ये सही डायग्नोसिस की जगह नहीं ले सकते। zinc की बहुत ज़्यादा डोज़ और बिना जाँचे प्रोडक्ट से बचें।
जड़ी-बूटी के पाउडर और "फर्टिलिटी बूस्टर" में भी यही दिक्कत है, साथ में एक और: क्वालिटी अलग-अलग होती है और कुछ प्रोडक्ट में भारी धातुएँ या छिपी हुई दवाएँ मिली होती हैं। इस पर ज़्यादा जानकारी के लिए हमारा लेख शिलाजीत और हर्बल सप्लीमेंट पढ़ें।
जब वीर्य में स्पर्म बिल्कुल न हो (azoospermia)
Obstructive azoospermia में रुकावट को कभी-कभी सर्जरी से खोला जा सकता है। Non-obstructive azoospermia में भी अक्सर micro-TESE से टेस्टिस से स्पर्म निकालकर IVF/ICSI में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इसकी योजना यूरोलॉजिस्ट या एंड्रोलॉजिस्ट को बनानी चाहिए।
क्या गर्मी और लाइफस्टाइल से स्पर्म क्वालिटी पर असर पड़ता है?
हाँ। अंडकोष शरीर के बाहर इसलिए होते हैं क्योंकि स्पर्म बनना शरीर के कोर तापमान (लगभग 37 °C) से करीब 2 से 4 °C कम तापमान पर सबसे अच्छा होता है। जो भी चीज़ स्क्रोटम को लंबे समय तक गर्म रखती है, वह क्वालिटी घटा सकती है।
- लैपटॉप को लंबे समय तक गोद में रखकर काम न करें।
- टाइट सिंथेटिक अंडरवियर की जगह ढीले सूती बॉक्सर पहनें, ताकि हवा आती रहे।
- बच्चे की कोशिश के दौरान गर्म पानी से नहाना, सौना और हॉट टब सीमित करें।
- बिना ब्रेक लंबे समय तक बैठे रहने से बचें, जैसे लंबी ड्राइव या डेस्क का काम।
- स्मोकिंग छोड़ें और शराब कम करें। दोनों का संबंध कम काउंट और मोटिलिटी से है।
- वज़न स्वस्थ रखें और नींद पूरी लें। खराब नींद, मोटापा और लगातार तनाव हार्मोन पर असर डालते हैं।
- जिम के एनाबॉलिक स्टेरॉयड और बिना रेगुलेशन वाले सप्लीमेंट से दूर रहें।
यौन स्वास्थ्य की समस्याएँ भी गर्भधारण पर असर डालती हैं। अगर इरेक्शन या स्खलन को लेकर चिंता है, तो हमारी ED की पूरी गाइड पढ़ें, क्योंकि ED या प्रीमैच्योर इजैकुलेशन होने पर सही समय पर संबंध बनाना और भी मुश्किल हो जाता है।
आमतौर पर इलाज की योजना क्या रहती है?
एक सामान्य रास्ता, जिसे डॉक्टर आपके हिसाब से बदलते हैं, कुछ ऐसा दिखता है:
- सही सीमन एनालिसिस (असामान्य हो तो दोहराएँ)
- कारण खोजें: जाँच, हार्मोन, अल्ट्रासाउंड
- लगभग 90 दिन कारण-आधारित इलाज और लाइफस्टाइल बदलाव
- दोबारा सीमन एनालिसिस और समीक्षा
अगर पूरे एक साइकिल के बाद भी सुधार न हो, या रिपोर्ट बहुत कम हो या स्पर्म बिल्कुल न दिखें, तो डॉक्टर इंतज़ार करने के बजाय जल्दी फर्टिलिटी विशेषज्ञ के पास भेज सकते हैं। महिला की उम्र भी मायने रखती है, इसलिए कपल की जाँच साथ में होनी चाहिए।
पक्का नहीं कि वजह क्या है?
2 मिनट का प्राइवेट हेल्थ चेक लें। एक रजिस्टर्ड डॉक्टर इसे देखकर संभावित वजह ढूँढते हैं और आपके साथ प्लान बनाते हैं।
2 मिनट का हेल्थ चेक लें →अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
स्पर्म काउंट सुधरने में कितना समय लगता है?
नए स्पर्म को बनने और परिपक्व होने में लगभग 72 से 90 दिन (करीब तीन महीने) लगते हैं। इसीलिए दोबारा सीमन एनालिसिस इलाज या लाइफस्टाइल बदलाव शुरू होने के करीब तीन महीने बाद किया जाता है, उससे पहले नहीं। सुधार इसके बाद भी जारी रह सकता है।
क्या ज़ीरो स्पर्म काउंट (azoospermia) का इलाज हो सकता है?
कभी-कभी हाँ। Obstructive azoospermia में रुकावट अक्सर सर्जरी से ठीक की जा सकती है। Non-obstructive azoospermia में भी micro-TESE से टेस्टिस में स्पर्म मिल सकते हैं जिन्हें IVF/ICSI में इस्तेमाल किया जाता है। कौन-सा रास्ता सही है, यह यूरोलॉजिस्ट या फर्टिलिटी विशेषज्ञ तय करता है।
क्या हस्तमैथुन से स्पर्म काउंट हमेशा के लिए कम हो जाता है?
नहीं। बार-बार स्खलन से सीमन वॉल्यूम और काउंट थोड़े समय के लिए घटता है, और कुछ दिन आराम के बाद सामान्य हो जाता है। इसीलिए लैब जाँच से पहले 2 से 7 दिन का गैप माँगती है। ज़्यादा जानकारी के लिए हमारी हस्तमैथुन के मिथक और तथ्य गाइड देखें।
मोटिलिटी बढ़ाने के लिए कौन-से सप्लीमेंट मदद करते हैं?
Coenzyme Q10, L-carnitine, zinc और selenium पर सबसे ज़्यादा अध्ययन हुए हैं, और कुछ ट्रायल में मोटिलिटी या काउंट में हल्का सुधार दिखा है। सबूत मिले-जुले हैं और ये कारण खोजने का विकल्प नहीं हैं। डोज़ और सुरक्षा के लिए पहले डॉक्टर से पूछ लें।
क्या testosterone इंजेक्शन या जिम बूस्टर से स्पर्म काउंट बढ़ता है?
नहीं, इनका असर उल्टा होता है। Testosterone और एनाबॉलिक स्टेरॉयड स्पर्म बनना बंद कर देते हैं और काउंट बहुत कम कर सकते हैं। जो पुरुष बच्चे चाहते हैं, उन्हें हार्मोन इलाज की ज़रूरत पड़ने पर आमतौर पर hCG जैसे दूसरे विकल्प दिए जाते हैं।
स्रोत
- WHO Laboratory Manual for the Examination and Processing of Human Semen, 6th edition — World Health Organization
- EAU Guidelines on Sexual and Reproductive Health — European Association of Urology
- Testosterone Therapy in Men with Hypogonadism: An Endocrine Society Clinical Practice Guideline (Bhasin et al., 2018) — Journal of Clinical Endocrinology & Metabolism
- Evaluation and Management of Testosterone Deficiency — American Urological Association
मेडिकल डिस्क्लेमर. यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी योग्य डॉक्टर से परामर्श का विकल्प नहीं है। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई प्रिस्क्रिप्शन दवा शुरू, बंद या साथ में न लें — कुछ ED दवाएँ दिल या ब्लड प्रेशर की दवाओं, ख़ासकर नाइट्रेट, के साथ ख़तरनाक हो सकती हैं। हम कंटेंट का रिव्यू कैसे करते हैं.