डायबिटीज और इरेक्टाइल डिसफंक्शन: क्यों होता है, क्या ठीक हो सकता है और क्या काम करता है
प्रकाशित 8 मार्च 2023 · अपडेट 2 अक्टू॰ 2026 · 10 मिनट
सीधा जवाब
डायबिटीज में ED इसलिए होता है क्योंकि ऊँची शुगर धीरे-धीरे उन ख़ून की नसों और नर्व्स को नुकसान पहुँचाती है जिनसे इरेक्शन बनता है, और अक्सर टेस्टोस्टेरोन भी घटा देती है। डायबिटीज़ वाले पुरुषों में ED का ख़तरा क़रीब 3 गुना होता है और अक्सर 10 से 15 साल पहले शुरू हो जाता है। यह हमेशा स्थायी नहीं होता: शुगर कंट्रोल, वज़न घटाने, एक्टिविटी और इलाज से कई पुरुषों में सुधार आता है।
क्या डायबिटीज़ से इरेक्टाइल डिसफंक्शन हो सकता है?
हाँ। डायबिटीज़ ED (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) के सबसे आम मेडिकल कारणों में से एक है, और डायबिटीज़ वाले पुरुषों में ED होने की संभावना बाकी पुरुषों से क़रीब 3 गुना ज़्यादा होती है। अगर शुगर निकलने के बाद से आप चुपचाप इरेक्शन की दिक्कत झेल रहे हैं, तो आप अकेले नहीं हैं। यह एक मेडिकल समस्या है, आपकी कोई कमज़ोरी नहीं।
ED अक्सर उन पहली दिक्कतों में होता है जो पुरुषों को महसूस होती हैं, कई बार आँख, किडनी या पैर की किसी समस्या से भी पहले। पूरी जानकारी के लिए हमारी गाइड देखें: इरेक्टाइल डिसफंक्शन के कारण, लक्षण और इलाज।
डायबिटीज़ से ED क्यों होता है?
डायबिटीज़ उन तीन चीज़ों पर असर डालती है जिन पर इरेक्शन टिका है: ख़ून की नसें, नर्व्स और हार्मोन। अक्सर तीनों साथ में प्रभावित होते हैं, इसी वजह से डायबिटिक ED थोड़ा ज़िद्दी होता है।
- सालों तक ब्लड शुगर ऊँची रहती है
- छोटी धमनियों की भीतरी परत को नुकसान
- नाइट्रिक ऑक्साइड कम बनता है, नसें ठीक से नहीं फैलतीं
- सिग्नल ले जाने वाली नर्व्स घायल होती हैं
- अक्सर टेस्टोस्टेरोन भी घट जाता है
- इरेक्शन कमज़ोर या कम देर का
- ख़ून की नसें: इरेक्शन के लिए लिंग की धमनियों को खुलकर चौड़ा होना पड़ता है ताकि उनमें ख़ून भरे। ऊँची शुगर इन छोटी नसों की परत को नुकसान पहुँचाती है, इसलिए नाइट्रिक ऑक्साइड कम बनता है और नसें ठीक से नहीं फैल पातीं।
- नर्व्स (न्यूरोपैथी): दिमाग़ और रीढ़ से लिंग तक का सिग्नल नर्व्स से होकर जाता है। लंबे समय तक ऊँची शुगर इन्हें चोट पहुँचाती है, ठीक वैसे ही जैसे पैरों में झनझनाहट होती है। कभी-कभी इससे वीर्य निकलने पर भी असर पड़ता है।
- टेस्टोस्टेरोन: टाइप 2 डायबिटीज़ वाले कई पुरुषों में, ख़ासकर जिनका पेट बड़ा हो, टेस्टोस्टेरोन कम पाया जाता है। इससे इच्छा घटती है और इरेक्शन कमज़ोर होता है। देखें लो टेस्टोस्टेरोन के लक्षण, इलाज और डाइट।
डायबिटीज़ में ED कितना आम है और कितनी जल्दी शुरू होता है?
डायबिटीज़ वाले पुरुषों में ED बहुत आम है, और यह अक्सर डायबिटीज़ न होने वाले पुरुषों से 10 से 15 साल पहले शुरू हो जाता है। यानी कई पुरुषों को 50 या 60 की उम्र की जगह 30 या 40 की उम्र में ही फ़र्क़ दिखने लगता है।
जितने साल से डायबिटीज़ है, शुगर जितनी अनियंत्रित रहती है और दूसरी जटिलताएँ जितनी होती हैं, ख़तरा उतना बढ़ता है। टाइप 2 डायबिटीज़ वाले युवा भारतीय भी इससे बचे नहीं हैं।
क्या डायबिटिक ED ठीक हो सकता है?
अक्सर इसमें सुधार हो सकता है, और कभी-कभी काफ़ी अच्छा, ख़ासकर अगर आप जल्दी क़दम उठाएँ। कितना ठीक होगा, यह इस पर निर्भर है कि शुगर कितने समय से ऊँची रही और नर्व्स व नसों को कितना नुकसान पहले ही हो चुका है।
- जितना जल्दी, उतना बेहतर: डायबिटीज़ के शुरुआती सालों में नुकसान अक्सर कुछ हद तक वापस ठीक हो सकता है। कई साल ख़राब कंट्रोल के बाद नर्व्स का नुकसान सिर्फ़ आंशिक रूप से ही ठीक होता है।
- HbA1c अच्छा रखें: स्थिर शुगर उन नसों और नर्व्स को बचाती है जो अभी ठीक हैं। आपका टारगेट डॉक्टर तय करेंगे; डायबिटीज़ की कोई दवा अपने आप न बदलें।
- वज़न घटाएँ: पेट की चर्बी कम होने से ख़ून का बहाव सुधरता है और ज़्यादा वज़न वाले पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन भी बढ़ सकता है।
- नियमित एक्टिविटी: तेज़ चलना या कसरत नसों की सेहत, शुगर कंट्रोल और मूड, तीनों को साथ में सुधारती है।
- बाक़ी कारणों का इलाज: BP और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करना, तंबाकू छोड़ना और शराब घटाना, सब इरेक्शन में मदद करते हैं।
इन बदलावों का असर महीनों में दिखता है, दिनों में नहीं। जब तक आप इन पर काम करते हैं, इलाज से मदद मिल सकती है, इसलिए "पूरी तरह ठीक" होने का इंतज़ार करके मदद लेना टालने की ज़रूरत नहीं।
डायबिटीज़ वाले पुरुषों में ED का इलाज क्या है?
इलाज के कदम किसी भी ED जैसे ही हैं, लेकिन डायबिटीज़ में PDE5 inhibitor की गोलियों को अक्सर ज़्यादा डोज़ या दोबारा कोशिश की ज़रूरत पड़ती है। फिर भी ये कई पुरुषों में काम करती हैं।
PDE5 inhibitors (sildenafil, tadalafil, vardenafil) FDA से मान्यता प्राप्त हैं और ED वाले क़रीब दो-तिहाई से तीन-चौथाई पुरुषों की मदद करती हैं। डायबिटीज़ में असर थोड़ा कम होता है, क्योंकि नसें और नर्व्स कम प्रतिक्रिया देती हैं। इसका मतलब यह नहीं कि दवा "फेल" हो गई: डॉक्टर डोज़ बढ़ा सकते हैं, यह देख सकते हैं कि गोली कैसे ली जा रही है (सब गोलियों के लिए उत्तेजना ज़रूरी है, और भारी चिकना खाना खाने के बाद sildenafil कम असर करती है), दूसरी PDE5 दवा आज़मा सकते हैं या tadalafil की रोज़ की कम डोज़ दे सकते हैं। ये गोलियाँ आदत नहीं बनातीं।
| विकल्प | यह क्या है | ध्यान रखने की बातें |
|---|---|---|
| शुगर, वज़न, BP, कोलेस्ट्रॉल का इलाज | हर इलाज की नींव | धीमा है, पर दिल, नर्व्स और किडनी को भी बचाता है |
| PDE5 inhibitors | Sildenafil (आम तौर पर 25 से 100 mg), tadalafil (ज़रूरत पर 10 से 20 mg, या रोज़ की कम डोज़), vardenafil | डायबिटीज़ में अक्सर ज़्यादा डोज़ लगती है; उत्तेजना ज़रूरी है; nitrates के साथ कभी नहीं |
| टेस्टोस्टेरोन ट्रीटमेंट | सिर्फ़ तब जब ब्लड टेस्ट में टेस्टोस्टेरोन कम निकले | शुक्राणु बनना घटाता है; नियमित मॉनिटरिंग ज़रूरी |
| वैक्यूम इरेक्शन डिवाइस | एक पंप और रिंग जो ख़ून को अंदर खींचते हैं | कोई दवा नहीं; गोली न ले पाने वाले कई पुरुषों में काम करता है |
| लिंग में इंजेक्शन या यूरेथ्रल सपोजिटरी | Alprostadil, लिंग में या उसके सिरे पर | नर्व्स पर उतना निर्भर नहीं; तरीक़ा डॉक्टर सिखाते हैं |
| पेनाइल इम्प्लांट | लिंग के अंदर सर्जरी से लगाया जाने वाला डिवाइस | बाक़ी विकल्प फेल होने पर आख़िरी रास्ता |
कौन से टेस्ट करवाने चाहिए?
कुछ आसान ब्लड टेस्ट बता देते हैं कि आपकी डायबिटीज़ कैसी चल रही है और ED में कोई और चीज़ तो योगदान नहीं दे रही। कौन से टेस्ट ज़रूरी हैं, यह डॉक्टर तय करेंगे।
- HbA1c: पिछले लगभग 3 महीनों की औसत शुगर। यह असल कंट्रोल दिखाता है, किसी एक दिन की फास्टिंग रीडिंग से बेहतर।
- लिपिड प्रोफाइल: कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स, जो धमनियों पर असर डालते हैं।
- सुबह का टेस्टोस्टेरोन: लगभग सुबह 10 बजे से पहले का ब्लड सैंपल; पहला नतीजा कम आए तो दोबारा किया जाता है।
- किडनी फंक्शन, थायरॉइड प्रोफाइल, BP: दूसरे कारण देखने के लिए।
क्या ED दिल की बीमारी की शुरुआती चेतावनी हो सकता है?
हाँ, हो सकता है। लिंग की धमनियाँ बहुत छोटी होती हैं, इसलिए रुकावट और नसों का नुकसान अक्सर दिल की बड़ी धमनियों से पहले यहीं दिखता है। ED हार्ट अटैक या स्ट्रोक से क़रीब 3 से 5 साल पहले आ सकता है।
डायबिटीज़ वाले पुरुष के लिए यह दोगुना मायने रखता है, क्योंकि डायबिटीज़ पहले से दिल का ख़तरा बढ़ाती है और भारतीयों में दिल की बीमारी जल्दी होने की प्रवृत्ति है। घबराने की बात नहीं है। अगर आप 40 से ऊपर हैं और ED नया है, तो डॉक्टर से दिल का ख़तरा जँचवाएँ (BP, कोलेस्ट्रॉल, शुगर, परिवार का इतिहास, ज़रूरत हो तो ECG)। तस्वीर का दूसरा हिस्सा हमारी गाइड हाई ब्लड प्रेशर और ED में है।
डायबिटीज़ और ED वाले भारतीय पुरुषों के लिए कौन से खान-पान और लाइफस्टाइल बदलाव मदद करते हैं?
रोज़ के भारतीय खाने और दिनचर्या में छोटे, दोहराए जा सकने वाले बदलाव उस सख़्त डाइट से बेहतर चलते हैं जिसे आप दो हफ़्ते बाद छोड़ दें। नीचे सब कुछ शाकाहारियों के लिए भी चलता है।
- चावल और रोटी की मात्रा: एक बार के खाने में चावल लगभग एक छोटी कटोरी रखें और आधी थाली सब्ज़ी, सलाद और दाल से भरें। ब्राउन राइस, मोटे अनाज (रागी, ज्वार, बाजरा) या बेसन मिला आटा चुनने और सब्ज़ियाँ पहले खाने से शुगर का उछाल कम रहता है।
- चाय और मिठाई: दिन में 3 से 4 कप मीठी चाय की चीनी जल्दी जुड़ जाती है। चीनी कुछ हफ़्तों में धीरे-धीरे घटाएँ। मिठाई को कभी-कभार के जश्न के लिए रखें, छोटे टुकड़े में, खाने के बाद, ख़ाली पेट नहीं।
- बिना मांस के प्रोटीन: दाल, चना, राजमा, पनीर, दही, अंकुरित अनाज, सोया और (अगर खाते हैं) अंडे पेट भरा रखते हैं और शुगर स्थिर रखते हैं।
- खाने के बाद टहलें: दोपहर और रात के खाने के बाद 10 से 15 मिनट की सैर खाने के बाद की शुगर का उछाल घटाती है। हफ़्ते के ज़्यादातर दिन लगभग 30 मिनट तेज़ एक्टिविटी का लक्ष्य रखें।
- तंबाकू और शराब: गुटखा, खैनी, बीड़ी और सिगरेट उन्हीं छोटी नसों को नुकसान पहुँचाते हैं जिन्हें डायबिटीज़ पहुँचाती है। देखें तंबाकू, गुटखा और ED। शराब शुगर के उतार-चढ़ाव और इरेक्शन दोनों बिगाड़ती है; देखें शराब और ED।
- नाइट शिफ्ट: खाने का समय नियमित रखें, सोने से ठीक पहले भारी खाना न खाएँ और लगभग 7 घंटे की नींद बचाकर रखें। कम नींद से शुगर बढ़ती है और टेस्टोस्टेरोन घटता है।
डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
अगर इरेक्शन की दिक्कत कुछ हफ़्तों से ज़्यादा चले, डायबिटीज़ है और शुगर ऊँची चल रही है, या आप 40 से ऊपर हैं और ED नया है, तो डॉक्टर को दिखाएँ। इसके गंभीर होने का इंतज़ार न करें।
- इरेक्शन एक महीने या उससे ज़्यादा से कमज़ोर या कम देर का हो गया है।
- पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन, धुंधला दिखना या बार-बार पेशाब आना।
- सीने में बेचैनी, हल्की मेहनत में साँस फूलना, या परिवार में कम उम्र में दिल की बीमारी का इतिहास।
- ED की कोई दवा अब असर नहीं कर रही। ख़ुद ज़्यादा न लें; डॉक्टर से रिव्यू करवाएँ।
सेक्सोलॉजिस्ट या यूरोलॉजिस्ट? डायबिटीज़ वाले ED के लिए ऐसा डॉक्टर चुनें जो शुगर, दिल, हार्मोन और सेक्स की सेहत को एक साथ देखे, सिर्फ़ गोली लिखने वाला नहीं।
भ्रम बनाम सच
भ्रम डायबिटीज़ में ED हमेशा के लिए है और कुछ नहीं हो सकता।
सच कई पुरुषों में सुधार आता है, ख़ासकर जब शुगर जल्दी कंट्रोल में आए और इलाज जुड़े। नर्व्स का नुकसान रिकवरी सीमित भी कर दे, तब भी कई इलाज मदद कर सकते हैं।
भ्रम डायबिटिक पुरुषों के लिए ED की गोलियाँ असुरक्षित हैं।
सच सेहत की जाँच के बाद लिखे जाने पर PDE5 inhibitors डायबिटीज़ वाले पुरुषों में आम तौर पर इस्तेमाल होते हैं। ये कुछ ख़ास हालात में ही असुरक्षित हैं, जैसे nitrates के साथ, इसीलिए डॉक्टर का पहले जाँचना ज़रूरी है।
भ्रम अगर गोली ने काम नहीं किया तो कुछ भी काम नहीं करेगा।
सच डायबिटीज़ में अक्सर पहली डोज़ कम होती है या गोली ग़लत तरीक़े से ली गई होती है। डॉक्टर डोज़ बदल सकते हैं, दवा बदल सकते हैं या दूसरी लाइन के विकल्पों पर जा सकते हैं।
पक्का नहीं कि वजह क्या है?
2 मिनट का प्राइवेट हेल्थ चेक लें। एक रजिस्टर्ड डॉक्टर इसे देखकर संभावित वजह ढूँढते हैं और आपके साथ प्लान बनाते हैं।
2 मिनट का हेल्थ चेक लें →अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या डायबिटीज़ में ED पूरी तरह ठीक हो सकता है?
इसमें काफ़ी सुधार आ सकता है, और कुछ पुरुषों में पूरी रिकवरी भी होती है, ख़ासकर जब डायबिटीज़ नई हो और शुगर कंट्रोल, वज़न व एक्टिविटी सुधरें। कई साल ऊँची शुगर के बाद नर्व्स और नसों का नुकसान सिर्फ़ आंशिक रूप से ठीक हो सकता है। फिर भी इलाज से संतोषजनक सेक्स लाइफ़ मिल सकती है।
डायबिटीज़ में मुझ पर Tadalafil या Sildenafil अच्छा असर क्यों नहीं करती?
डायबिटीज़ में नसें और नर्व्स कम प्रतिक्रिया देती हैं, इसलिए सामान्य डोज़ कम पड़ सकती है। दूसरे आम कारण हैं: बिना उत्तेजना के गोली लेना, भारी चिकना खाना खाकर लेना, या टेस्टोस्टेरोन कम होना। डोज़ ख़ुद न बढ़ाएँ; डॉक्टर उसे एडजस्ट कर सकते हैं या प्लान बदल सकते हैं।
क्या डायबिटिक पुरुषों में कम टेस्टोस्टेरोन से ED होता है?
यह योगदान दे सकता है। टाइप 2 डायबिटीज़ और मोटापे वाले पुरुषों में कम टेस्टोस्टेरोन आम है, और यह इच्छा व इरेक्शन की मज़बूती घटाता है। इसकी जाँच सुबह के ब्लड टेस्ट से होती है, और इलाज सिर्फ़ तब होता है जब यह पक्का कम निकले। याद रखें कि टेस्टोस्टेरोन थेरेपी शुक्राणु बनना घटाती है।
डायबिटीज़ वाले पुरुषों में ED किस उम्र में शुरू होता है?
अक्सर डायबिटीज़ न होने वाले पुरुषों से 10 से 15 साल पहले, इसलिए कई पुरुषों को 30 या 40 की उम्र में बदलाव दिखता है। शुरुआत जल्दी होने की संभावना ज़्यादा है अगर शुगर लंबे समय से ऊँची रही हो, आप धूम्रपान या तंबाकू चबाते हों, या वज़न ज़्यादा हो।
क्या 40 से ऊपर के पुरुष में नया ED दिल की समस्या का संकेत है?
हो सकता है। ED हार्ट अटैक या स्ट्रोक से क़रीब 3 से 5 साल पहले आ सकता है, क्योंकि लिंग की छोटी धमनियाँ सबसे पहले प्रभावित होती हैं। इसका मतलब यह नहीं कि आपको हार्ट अटैक आएगा, लेकिन BP, कोलेस्ट्रॉल, शुगर और दिल के ख़तरे की जाँच करवाने का यह अच्छा कारण है।
स्रोत
- Erectile Dysfunction (ED) Guideline — American Urological Association (AUA)
- Diabetes and Sexual and Bladder Problems — National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK)
- Erectile Dysfunction — National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK)
- Erectile dysfunction (impotence) — NHS
- Guidelines on Sexual and Reproductive Health — European Association of Urology (EAU)
- Tainted Sexual Enhancement Products — U.S. Food and Drug Administration (FDA)
मेडिकल डिस्क्लेमर. यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी योग्य डॉक्टर से परामर्श का विकल्प नहीं है। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई प्रिस्क्रिप्शन दवा शुरू, बंद या साथ में न लें — कुछ ED दवाएँ दिल या ब्लड प्रेशर की दवाओं, ख़ासकर नाइट्रेट, के साथ ख़तरनाक हो सकती हैं। हम कंटेंट का रिव्यू कैसे करते हैं.